भविष्य आर्टिफ़िशल इंटेलिजेन्स का

बापू कहते थे कि मशीनें “सांप की ऐसी बामी है जिसमें एक से लेकर सौ सांप तक हो सकते है”।गांधी जी मशीनों को भारत की गरीबी और भारतीय भूभाग में व्याप्त बीमारियों के लिए ज़िम्मेदार बताते थे ।

आज़ादी के बाद भारत बदला और बदलते भारत में मशीनों का एक अलग स्थान रहा , खेतो में बैल गाडियो की जगह ट्रेक्टर आ गए, शहरो में कपड़ो की मिलें और प्रिन्टिंग प्रेसो का जाल सा बिछ गया। परेशानी यह थी कि विद्रोह उस दौर में भी हुआ परंतु जनसंख्या कम थी।हालांकि बी.आर चोपड़ा की 1957 में आई दिलीप कुमार द्वारा अभिनीत कालजयी फिल्म ” नया दौर” में उस वक्त के लोगो के मशीनों का आगमन , जीवन पर प्रभाव और मजदूरों का विद्रोह दिखाया गया है। भारत की परिस्थितयां मजदूरों के लिए कभी उतनी अच्छी नहीं रही और हर दौर में बेरोज़गारी बड़ी समस्या रही।पहले मजदूरों और किसानों का शोषण अंग्रेज़ो ने किया फिर आज़ाद भारत मे बड़े मिल मालिकों ने, फिर फैक्ट्रियों में कार्पोरेट घरानों द्वारा जो आज तक जारी है। आज भारत के महानगरों के गली गली में एक उद्योग चलता है जहाँ उत्तर भारत के मजदूर बेहद कम पैसो में अत्यधिक काम करने और जानवरों से भी बदतर जिंदगी जीने के लिए मजबूर है। वहीं परिस्थितयां बड़े कॉलेज से इंजिनीरिंग , कम्प्यूटर साइंस ,एम. बी.ए करने वालो की भी अच्छी नहीं, ज़रूरतों और उनकीपूर्ति की बेहिसाब दौड़ में अधिकांश लोगो का जीवन गुज़रा जा रहा है।

बेरोजगारी आज भी बड़ी समस्या है और सही क्षमता को सही कार्य मिलना भी मुश्किल है, भारत के लगभग पौने चार प्रतिशत जनसंख्या (6 करोड़) सरकारी आंकड़ो के हिसाब से पूर्णतः बेरोजगार है, और 67 प्रतीशत लोग दस हज़ार से भी कम मासिक आय में जीवन यापन कर रहे है । बेरोजगारी के आंकड़े भयावह है…. 58 प्रतिशत ग्रेजुएट और 62 प्रतिशत पोस्ट ग्रेजुएट बेकाम है और अपने शिक्षा और कौशल के अनुरूप कार्य नहीं मिलता। अब जहां वर्तमान सरकार यह कहती है कि भारत के 97 प्रतिशत कार्यबल के पास कार्य करने का कौशल नही है, और 76 प्रतिशत घरों को सरकारी रोजगार योजनाओ का फायदा नहीं पहुंच रहा।

जितने भी आंकड़े और परिस्थितयां है वो साफ साफ ये अंदेशा देती है कि रोजगार भारत का कर्क रोग है।

इस समय का नवीनतम अविष्कार जो आने वाले भविष्य में विश्व और भारत में रोजगार को प्रभावित करने वाला है , वह है कृत्रिम बुद्धिमत्ता उर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यह मशीनों की बुद्धि को दर्शाता है। जिस प्रकार मनुष्य वातावरण और हालात देख निर्णय ले पाता है अगर वैसे ही कोई मशीन किसी परिस्थिति अनुरूप निर्णय ले , जो कि उस घड़ी में सबसे उपयुक्त हो तो उसे उस यन्त्र की कृत्रिम बुद्धि कहते है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वह शाखा है जिससे रोबोट को इफेक्टिव और इंटेलीजेंट बनाया जाता है, और इस प्रकार के रोबोट विदेशो में एवं देश की कई बड़ी कम्पनियो में अपनी जगह बना चुके है, जहां वो पूर्व में मजदूरों और कारीगरो द्वारा किये गए काम को खुद कर रहे है। ब्रिटिश गणितिज्ञ एलन माथिसॉन ट्यूरिंग को अर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का पिता माना जाता है, उन्होंने ने 1950 में यह भविष्यवाणी की थी कि आने वाले वक्त में वैसे मानव कार्य जिसे इंसान करने में असफल होगा वैसे भी कार्य मशीने आसानी से कर देगी।

गूगल , फेसबुक और अमेज़न जैसी कंपनियां बहुत भारी निवेश अपने रिसर्च और डेवलपमेंट डिवीज़न में कर रही है और वैसी स्टार्ट अप कम्पनियो को खरीद रही है जो मशीन लर्निंग,प्राकृतिक भाषा, और इमेज प्रोसेसिंग में कार्य कर रही है। भारतीय कंपनी टेक महिंद्रा भी इसमें पीछे नही है , विदेशी कंपनी के साथ मिलकर चीन के शंघाई शहर में आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस लैब की स्थापना करने जा रही है , और हाल ही में हुए हैदराबाद में हुए एनुअल इवेंट मिशन इंनिवशन में फार्म गुरु नामक नामक यूनिट प्रदर्शनी में पेश की , वो भारत भारत मे किसानी के तरीकों को बदलने की सोच रही है कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहारे , बीज रोपण से लेकर, कटाई के तरीकों को बदल देने का ख्वाब देख रहे है । और हजार नए लोगो को कंपनी से जोड़ना चाहते है , हालांकि अभी ये बेहद ही शुरुआती परिस्थिति है कहा नही जा सकता कि अर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का भाविष्यकैसा होगा । क्योंकि अभी तक ये साफ नही हो पाया है कि इसके सुरक्षा और रखरखाव में कितना खर्च आएगा और मशीनें अगर गलत हाथों में चली जाती हैं तो वह परिस्थिति भयावह होगी।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जैसा शुरुआत में लोग कम्प्यूटर से डरे थेकि वो रोजगार छीन लेगा , वहां उसके उलट उसने करोड़ो रोजगार पैदा किया और शायद आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का भी वैसा ही भविष्य हो।

लेखक के बारे में- लेखक आशुतोष कुमार, इंडिया टुडे मीडिया इन्स्टिटूट में प्रशिक्षु पत्रकार हैं

संपादन- देवर्षि त्रिपाठी

प्रकाशन- अनुराग शर्मा


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