आधुनिकता की प्राचीन कड़ियाँ

Written By: Arjun Deodia

भारत में आधुनिकता को समझने के लिए हम क्या देखते हैं? शहर में बिजली-पानी की व्यवस्था, यातायात सुविधाएँ, अच्छी सड़कें या अस्पताल आदि। लेकिन क्या सिर्फ इसी से आधुनिकता परिभाषित होती है? 

जनसंख्या नई ऊंचाईयाँ छू रही है,लेकिन कंडोम शब्द से हम अब भी शर्माते हैं। सेक्स सुनते ही शरीर में तरंगे दौड़ने लगती हैं और ‘सेक्स एजुकेशन’ की बात करें तो अधिकतर जनता भाग खड़ी होगी। हम 125 करोड़ के हो चुके हैं पर ‘सेक्स एजुकेशन’ देश में केवल एक जुमला है।

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Picture Courtesy: Shubhrika Bahadur Satyawakta

ऐसे में यदि कहा जाए कि भारत का एक प्राचीन शहर है, जहां सदियों से मूर्तियों के माध्यम से सेक्स की अलग-अलग मुद्राओं का  ज्ञान बाँटा जाता है, तो आपको कैसा लगेगा? यह मनगढ़न्त कहानी नहीं सच है! भारत के दिल में ऐसा एक नगर बसता है,नाम है खजुराहो। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में आने वाला एक गांव खजुराहो है, जहां हिन्दुओं और जैनियों के मंदिरों का समूह स्थित है। यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल ( युनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स) में भी यह मंदिर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। इन मंदिरों का निर्माण 950 ईसवी से 1050 ईसवी के बीच चंदेल राजाओं ने करवाया था । खजूर के जंगलों से इस गांव का नाम खजुराहो पड़ा। इन मंदिरों की खासियत यहां की कामुक मूर्तियाँ हैं जो हमेशा आकर्षण का केंद्र बनी रही। मंदिर की दीवारों पर ऐसी मूर्तियाँ पर्यटकों को आश्चर्यचकित कर देती हैं। एक अनोखी बात यह है कि भारत देश, जहां समलैंगिकता कानूनन अपराध है, उसी देश के प्राचीन मंदिर में समलैंगिकता को मूर्तियों के द्वारा समझाया गया है । जिन सेक्स क्रियाओं के बारे में हम बात करने से कतराते हैं उन क्रियाओं की जानकारी को मूर्तियों एवं आकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। आखिर यह प्राचीन भारत में मुमकिन कैसे हुआ? किस्से अनेक हैं।

कहते हैं कि एक अत्यंत सुन्दर कन्या थी जिसका नाम था हेमवती। चन्द्रमा ने उन्हें स्नान करते हुए देख लिया था और हेमवती की खूबसूरती से वह इतने आकर्षित हो उठे की हेमवती से संबंध बना बैठे। इस सम्बंध ने एक बालक को जन्म दिया जिसका नाम चन्द्रवर्मन पड़ा। चंद्रवर्मन ने आगे चलकर साम्राज्य को सन्चालित किया तथा अपनी माँ से प्रेरित होकर मनुष्य के अन्दर दबी कामुकता को बाहर निकालने के लिए इन मंदिरों का निर्माण करवाया। लोगों का यह भी कहना है कि इन मूर्तियो का निर्माण प्रजा को अलग-अलग सेक्स क्रियाओं और सवस्थ सेक्स के बारे में जानकारी देने के लिए किया गया था। ख़ैर इन कहानियों का कोई वजूद नहीं। इस कलाकारी से यह स्पष्ट होता है कि सेक्स न तो कोई पाप है, न ही पुण्य।सेक्स मात्र एक क्रिया है जिसके अपने शारीरिक फायदे है। इसे हम शरीर की आवश्यकता का नाम भी दे सकते हैं। 21वीं सदी के होकर भी क्यों हम  सेक्स , कंडोम ,समलैंगिकता आदि की चर्चा से पीछे हटते हैं। क्या सेक्स से जुड़ी जानकारियाँ आधुनिकता में नहीं आती है? या प्राचीन भारत हमसे ज़्यादा आधुनिक था? खजुराहो के यह आधुनिक मंदिर खुले विचारों में विदेशियों को भी टक्कर देते हैं। भारत संस्कृति और परंपरा का देश अवश्य माना जाता है किंतु  सेक्स और संस्कृति आपस में कैसे जुड़े हैं?स्वस्थ सेक्स के बारे में जानना हमारी संस्कृति के विरूद्ध नहीं। शालीनता के नाम पर अश्लीलता स्वीकार्य नहीं है पर हमें आधुनिकता के कुछ मापदण्ड परिवर्तित करने चाहिए, क्यों न प्राचीन लोगों से ही सीखकर ही ?

About the Author: Arjun Deodia is a trainee journalist in India Today Media Institute.
Published by: Shubhrika Bahadur Satyawakta

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