दौर ताजपोशी का..

लेखन- देवर्षि त्रिपाठी

वर्तमान समय में भारत में ताजपोशी का दौर चल रहा है। समय ताज और उसके मालिकों को या तो खुद चुन रहा है या फिर मजबूरी उन्हें वहां तक ले ही आती है। ये सिलसिला शुरू हुआ देश की बेटी मानुषी छिल्लर से…2 दिन के भीतर भीतर ही वो देश की लड़की हो गयी और ताज अपने सर जमाया। विश्व सुंदरी बनना आसान बात नहीं, मेहनत और लगन ने उसे इस ताज तक पहुँचाया। उसकी मेहनत जगजाहिर थी। कुछ का यह भी कहना था कि इस तरीके की प्रतियोगिताएं पूर्व नियोजित होती हैं, किसी देश विशेष की राजनीति और आर्थिक पृष्ठभूमि के चलते। परंतु बातों पर ज़्यादा गौर न किया जाय तो ये बात साबित होती ही है कि उसकी जीत उसके प्रयासों का प्रतिफल है और यकीनन पर्याप्त सकारात्मक प्रतिफल।

img_3449
Image Courtesy- FirstPost

ताजपोशी का दूसरा चरण वाकई में ताजपोशी ही था जो की दिसम्बर की ग्यारह तारिख को हुआ, युवराज की ताजपोशी। किसी भी संस्था या राज्य का नेतृत्व करना अपने आप में गौरव का विषय है। इस स्तर तक पहुंचने के दो रास्ते है या तो आप काबिल होने चाहिए या फिर युवराज। इस बार दूसरा पक्ष भारी था। युवराज को ही अगर अध्यक्ष बनाना था तो तो चुनाव करा कर ढोंग की क्या आवश्यकता थी? और अगर चुनाव ही कराया तो माहौल ऐसा क्यों बनाना की विपक्ष में दावेदार ही न खड़े हो पाएं? युवराज की ताजपोशी को लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के लिबास में पेश करना कहाँ तक जायज़ है ये तो भारत खुद निर्धारित करेगा।

img_3450
Image Courtesy- FirstPost

तीसरी ताजपोशी कप्तान साहब की है। हालाँकि सर पर सेहरा बंधना ताजपोशी तो नहीं पर जब आप भारतीय दाल के कप्तान हों और अनुष्का शर्मा जैसा सितारा आपके बराबर में खड़े होने वाला है तो ये सेहरा भी ताजपोशी से कम भी नहीं होगा। और जब आपकी अनुपस्तिथि में आपकी टीम ऐसा प्रदर्शन कर जाय तो आपकी कप्तान के रूप में ताजपोशी जायज़ थी और सेहरा बंधना तो प्रकृति का नियम था, सो बंध गया।

img_3451
Image Courtesy- Twitter

खैर बधाई सभी दावेदारों को ताजपोशी की, कोहली साहब को शुभकामनाएं की आप देश के लिए बहोत अच्छा खेले और युवराज से उम्मीद है कि वो देश से न खेलें। उम्मीद है कि इस ताजपोशी के बाद कुर्ते के फटे जेब अब तो सिल जायेंगे और खबर तो ये भी आई है कि पार्टी विशेष के मुख्यालय में बोरियों से आलू मंगवाए गए हैं, ऐसा कहा जा रहा है कि कार्यकर्ताओ को सोना मिलने वाला है।

लेखक के बारे में – लेखक देवर्षि त्रिपाठी इंडिया टुडे मीडिया इन्स्टिटूट में प्रशिक्षु पत्रकार हैं

सम्पादन एवं प्रकाशन- अनुराग शर्मा


DISCLAIMER : Any views or opinions represented in this blog belong solely to the writer and do not represent those of people, institutions or organisations that the owner may or may not be associated with in professional or personal capacity, unless explicitly stated.

Any views or opinions are not intended to malign any religion, ethnic group, club, organisation, company or an individual. All content provided on this blog is for informational purposes only. The owner of this blog makes no representations as to the accuracy or completeness of any information on this site or found by following any link on this site.

Advertisements