क्या चौथी बार सत्ता का सुख भोग पाएंगे रमन ?

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लेखन- आदित्य पांडेय

इस समय छत्तीसगढ़ में डॉ रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार है, डॉ रमन सिंह का मुख्यमंत्री के रूप में यह लगातार तीसरा कार्यकाल चल रहा है। राज्य में अगला विधानसभा चुनाव ठीक एक साल बाद होना है। क्या रमन सिंह को चौथा कार्यकाल मिलेगा?

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एक सवाल सबके मन में उठ रहा होगा कि चुनाव तो अगले साल है, तो यह चर्चा अभी क्यों? लेकिन भाजपा के इस कार्यकाल में कुछ घटनाक्रम ऐसे है जो 2018 के चुनाव को रोचक बनाते है। वो चाहे अजित जोगी जैसे बड़े कांग्रेसी नेता का पार्टी छोड़कर नई पार्टी बनाना हो, या अमित जोगी  को कांग्रेस पार्टी और राजनीति से बर्खास्त करना या रमन सिंह का चॉपर घोटाले में नाम आना या इसी महीने भाजपा के बड़े नेता एवं मंत्री राजेश मूणत का सेक्स सीडी कांड हो।

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विद्याचरण शुक्ल, नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा जैसे दिग्गज नेताओं की हत्या के बाद से कांग्रेस बेहद कमजोर हो चुकी है। इन बड़े नेताओं के हत्या के बाद भी कोई भी कांग्रेसी नेता लोगों की आंखों का तारा बन नही पाया है। यह कांग्रेस तब और कमज़ोर हो गयी जब अजित जोगी ने पार्टी छोड़ दी। अजित जोगी को ज़मीन से जुड़े नेताओं में गिना जाता है। ज़ाहिर सी बात है कि जब कोई इतना बड़ा नेता इतनी बड़ी पार्टी छोड़ेगा तो शोर दिल्ली तक ज़रूर सुनाई देगा। तो क्या जोगी की कांग्रेस भूपेश बघेल की कांग्रेस से ज़्यादा मजबूत है? क्या अब सीजेसीजे (छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी) नया विपक्ष होगा?

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क्योंकि सीजेसीजे का अगले चुनाव में सत्ता में आना बहुत मुश्किल है, लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है। जब अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सत्ता में काबिज हो गए तो यह तो ठहरे अजित जोगी, जिनका नाम ही काफी है। अजित जोगी का पिछड़े जाति के लोगों में प्रभाव ज़्यादा है और यही लोग छ.ग. की आबादी का आधा हिस्सा हैं। राजेश मूणत का सेक्स सीडी कांड हो, बृजमोहन अग्रवाल का ज़मीन घोटाले में नाम हो या कतिथ रूप से रमन सिंह का चॉपर घोटाले में नाम शामिल होना या फिर उनके बेटे अभिषेक सिंह का पैराडाइस पेपर्स में नाम आना, बहुत कुछ भाजपा के खिलाफ जाता दिख रहा है। यह सारी चीज़ें अजित जोगी को खुश कर सकती है। लेकिन पिछले चुनाव में भी कांग्रेस के हक़ में सारी हवाएं होने के बावजूद भाजपा जीत गयी थी।

रमन सिंह ने हाल ही में 19 लक्ज़री पजेरो गाड़ियां खरीदी है, जिसके अंत के आखरी 4 अंक 0004 है जो इनके चौथे कार्यकाल को हासिल करने के टोटके को दर्शाती है। यह टोटका उदासीनता, अविश्वास और हार के डर को मजबूती से पेश करती दिख रही है। इस डर को अजित जोगी ने ही पैदा किया है और जहाँ तक जीत का सवाल है, तो रमन सिंह जान लें कि उन्हें बहुमत मिलना भी मुश्किल नज़र आ रहा है। जोगी जीतें या हारें लेकिन सीटें भाजपा की ज़रूर काटेंगे और यह टोटका इसी डर का प्रतीक है।
तो क्या कमज़ोर नेतृत्व वाली कांग्रेस इस बचे एक साल में कुछ उथल पुथल मचा पाएगी? क्या अजित जोगी की नई पार्टी के नेतृत्व को जनता मौका देगी? क्या भाजपा को चौथी बार बहुमत मिलेगा? क्या तीनों बड़ी पार्टियां बहुमत के लिए तरस जायेंगी? जैसा छग के चुनाव परिणामों का इतिहास रहा है, टक्कर तो बहुत बड़ी होने वाली है। दिलचस्प होगा यह देखना की बचे एक साल में और कैसे कैसे घटनाक्रम सामने आते हैं।

 

लेखक के बारे में – लेखक आदित्य पांडेय, इंडिया टुडे मीडिया इंस्टिट्यूट में प्रशिक्षु पत्रकार हैं
संपादन- देवर्षि त्रिपाठी
प्रकाशन-अनुराग शर्मा


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